पीएम के इवेंट के पास गिरफ्तार संदिग्ध मामले में नया ट्विस्ट, आरोपी ने कोर्ट में कहा- मैं खुद धोखे का शिकार

Hindi | 09 September, 2026 | 01:01 PM
સાંજ સમાચાર

मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले बीकेसी पुलिस और मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) ने दो संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया.  मुख्य आरोपी रोहन पारेख और उसके बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे को मंगलवार को अदालत में सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 11 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है.

सुनवाई के दौरान क्राइम ब्रांच ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए गंभीर आरोप लगाए. जांच अधिकारियों ने बताया कि 24 साल के आरोपी रोहन पारेख ने सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से पढ़ाई की है और उसका बैकग्राउंड गणित और फाइनेंस का है.

पुलिस को मौके से रोहन के पास पीएमओ अधिकारी का एक आईकार्ड बरामद हुआ था. इस पहचान पत्र पर केवल 'C Grade' लिखा था, उस पर पद का कोई नाम नहीं था और न ही कोई 'Validity Date' दर्ज थी, केवल 'Issue Date' लिखी हुई थी.

क्राइम ब्रांच ने जोर देकर कहा कि शुरुआती जांच के आधार पर यह सीधे तौर पर धमकी का मामला प्रतीत होता है. पुलिस ने खुलासा किया कि इस पूरी साजिश में एक तीसरा आरोपी प्रथमेश बागूर भी शामिल है, जो रोहन का दोस्त है और फिलहाल फरार चल रहा है. पुलिस ने दलील दी कि मामले की पूरी परतें खोलने और फरार आरोपी को पकड़ने के लिए दोनों आरोपियों से हिरासत में पूछताछ बेहद जरूरी है.

दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के वकीलों ने रोहन का पक्ष रखते हुए पुलिस के दावों को खारिज करने की कोशिश की. रोहन के वकील ने कोर्ट के सामने दावा किया कि रोहन पारेख कोई अपराधी नहीं बल्कि खुद धोखाधड़ी का शिकार हुआ है. वकील के मुताबिक, रोहन को 'तरुण' नाम के एक शख्स के जरिए पीएमओ के अतिरिक्त सचिव के नाम से एक ईमेल प्राप्त हुआ था. इसी ईमेल के आधार पर उसे पीएमओ से जुड़ी जानकारी दी गई थी.

अदालत में खुद रोहन पारेख ने कहा, "मैं कोई अपराधी नहीं हूं, मैं खुद इस फर्जीवाड़े का शिकार हुआ हूं. मुझे PMO के नाम पर गलत और फर्जी जानकारी दी गई थी."

अदालत में सुनवाई के दौरान जज ने बचाव पक्ष के वकील से सीधा सवाल पूछा कि क्या आरोपी को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के कार्यक्रम के सुरक्षा प्रोटोकॉल की कोई जानकारी थी?

इस सवाल पर वकील ने दलील दी कि रोहन की नीयत खराब नहीं थी. घटना से एक दिन पहले वह सिर्फ व्यवस्था देखने कार्यक्रम स्थल के आसपास गया था और उसने वहां पास के ही एक मॉल से परफ्यूम भी खरीदा था. लेकिन पुलिस का कहना है कि आरोपी ने एक रात पहले आयोजन स्थल के आसपास रेकी भी की थी.

मामले में गिरफ्तार दूसरा आरोपी 45 साल का दिलीप कुंडे है. पुलिस ने इसे कल्याण से दबोचा है. वह साल 2024 से रोहन पारेख के बॉडीगार्ड के तौर पर काम कर रहा है. जांच में सामने आया है कि दिलीप पूर्व सीआईएसएफ (Ex-CISF) जवान है और जिस रिवॉल्वर के साथ वह पकड़ा गया है, उसका लाइसेंस उत्तर प्रदेश (UP) का है.

इतना ही नहीं, जांच एजेंसियों को पता चला है कि दिलीप कुंडे का परिवार मुख्य रूप से ड्रोन से जुड़े कारोबार में शामिल है.

खार इलाके का रहने वाला मुख्य आरोपी रोहन पारेख एक बेहद रसूखदार और बड़े कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखता है. उसके पिता का नाम प्रेमाल पारेख बताया जा रहा है. सुनवाई के दौरान रोहन का पूरा परिवार कोर्ट रूम में मौजूद था.

फिलहाल, पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि आखिर रोहन ने पीएमओ का फर्जी पहचान पत्र किस मकसद से बनवाया था. क्या उसे सच में किसी 'तरुण' नाम के शख्स ने झांसा दिया था या फिर यह सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोई सोची-समझी साजिश थी? पुलिस अब फरार चल रहे तीसरे आरोपी प्रथमेश बागूर की तलाश में छापेमारी कर रही है.

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