भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 0.25 फीसदी बढ़ा सकता है. एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में अक्टूबर के बाद दिसंबर में भी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की वकालत की है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और महंगाई के दबाव को इसके पीछे बड़ी वजह बताया गया है. रेपो रेट बढ़ने से फ्लोटिंग रेट वाले लोन की ईएमआई बढ़ सकती है, वहीं एफडी पर ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद से निवेशकों को फायदा मिल सकता है.
लोन लेने वालों के लिए आने वाले महीने मुश्किल हो सकते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ाने की तैयारी कर सकता है. एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की जानी चाहिए. इसके बाद दिसंबर में भी इतनी ही बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है. अगर ऐसा होता है तो होम लोन, कार लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की ब्याज दर और ईएमआई बढ़ सकती है.
हालांकि, ब्याज दर बढ़ने का दूसरा पहलू जमाकर्ताओं के लिए अच्छी खबर लेकर आ सकता है. रेपो रेट बढ़ने पर बैंक और दूसरी वित्तीय संस्थाएं एफडी की ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी कर सकती हैं. यानी जिन लोगों के पास एफडी है या जो आने वाले महीनों में एफडी कराने की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें पहले के मुकाबले बेहतर ब्याज मिल सकता है.
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में तेज बढ़ोतरी और दुनिया में बने भू-राजनीतिक तनाव से महंगाई का दबाव बढ़ रहा है. कच्चे तेल की कीमत हाल में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. रिपोर्ट के एक अनुमान के मुताबिक, अगले 15 दिनों में कीमत 123 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है. हालांकि, यह खराब स्थिति का अनुमान है, सामान्य स्थिति का नहीं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महंगाई का दबाव अब कुछ चुनिंदा चीजों तक सीमित नहीं है. जनवरी 2026 में सीपीआई में 90 फीसदी भार वाले सामानों की संख्या 22 थी, जो जुलाई में बढ़कर 53 हो गई. यानी महंगाई का असर ज्यादा चीजों पर दिखाई देने लगा है.
अगस्त में आरबीआई ने लगातार चौथी बैठक में रेपो रेट 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था. अब अगली मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होगी. एसबीआई रिसर्च ने अक्टूबर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद दिसंबर में भी इतनी ही बढ़ोतरी की वकालत की है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसका फैसला अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से ज्यादा भारत में बढ़ते आर्थिक जोखिम और महंगाई के दबाव को देखकर किया जा सकता है.
रेपो रेट बढ़ने का फायदा एफडी कराने वालों को भी मिल सकता है. आमतौर पर बैंक अपनी जमा दरों में बदलाव करते हैं, इसलिए रेपो रेट बढ़ने पर एफडी की ब्याज दरें भी ऊपर जा सकती हैं. कोरोना के दौरान आरबीआई ने रेपो रेट घटाकर 4 फीसदी तक किया था, जिसके बाद एफडी की दरें भी नीचे आई थीं. बाद में महंगाई बढ़ने पर रेपो रेट बढ़ाया गया तो एफडी पर मिलने वाला ब्याज भी बढ़ा. इसलिए अगर अगले कुछ महीनों में रेपो रेट बढ़ता है, तो एफडी निवेशकों के पास ज्यादा ब्याज वाली एफडी में पैसा लॉक करने का मौका हो सकता है.
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