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BRICS डिनर का मेनू देख राहुल गांधी छोले-भटूरे क्यों खाने लगे? भारत के मेहमानों के लिए वेज पहली बार तो नहीं


સાંજ સમાચાર

नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. लेकिन उतना ही ध्यान इसके मेन्यू ने भी खींचा है. दरअसल यहां आमंत्रित दुनिया के बड़े नेताओं के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से आयोजित डिनर गाला का मेन्यू चर्चा में आ गया. सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा छिड़ी है कि ऐसे बड़े आयोजन में केवल वेज खाने क्यों परोसे गए? नॉनवेज डिश क्यों मेन्यू का हिस्सा नहीं रहा? देश में विपक्ष का सबसे बड़े चेहरे कांग्रेस के राहुल गांधी ने भी छोले भटूरे की फोटो पोस्ट करते हुए इनडायरेक्टली इस सम्मेलन में खाने को लेकर तंज कसा. मोदी सरकार को घेरने का कोई और मौका ना पाकर विपक्ष केवल खाने की मेन्यू तक ही सिमट कर रह गया.

ब्रिक्स समिट का आयोजन कैसा रहा और इसमें भारत की कूटनीति किस हद तक सफल रही, इसका पैमाना केवल इस बात से ही लगाया जा सकता है कि विपक्ष को और सरकार के आलोचकों को एकमात्र समस्या खाने के मेन्यू में मौजूद विकल्पों को लेकर ही रही. भारत की तरफ से शानदार मेजबानी, ग्लोबल लेवल पर देशों के साथ पार्टनरशिप, इकोनॉमिक एजेंडा, भारत का बढ़ता प्रभाव, डिप्लोमेटिक लेवल पर सफलता पर किसी तरह की बात नहीं हुई. आलोचना का सारा फोकस केवल खाने की मेन्यू पर आकर टिक गया.

जो विपक्षी नेता सम्मेलन से एक दिन पहले तक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नहीं आने की बात को हवा देकर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में था, उसके हाथ में आखिर में केवल खाने का मेन्यू ही लगा. जिनपिंग भारत में आ गए लेकिन रात में खाने की टेबल पर नहीं पहुंचे. इसको लेकर यहां तक कहा जाने लगा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसलिए गाला डिनर में नहीं गए क्योंकि वहां नॉनवेज खाने का ऑप्शन नहीं था.

भारत का भी रुख ऐसा है कि यहां के अपने मेनू समय-समय पर बदलते रहे हैं. जैसे 2019 में शी जिनपिंग के तमिलनाडु वाले दौरे में उनके लिए मांसाहारी व्यंजन थे. जबकि 2023 में चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग और इस बार 2026 में राष्ट्रपति जिनपिंग के लिए ऐसा नहीं था. यह किसी सख्त नियम की बजाय उस प्रोग्राम की थीम पर निर्भर करता है. जैसे इस बार बाजरे का प्रचार करना शामिल है.

ब्रिक्स सम्मेलन का शाकाहारी मेनू भारत के लिए कोई नई बात नहीं थी. शी जिनपिंग का उस डिनर में ना पहुंचना भी किसी विरोध के कारण नहीं बल्कि सामान्य कारणों से था. सोशल मीडिया ने इन दोनों बातों को आपस में जोड़कर अफवाहें फैलाईं, जिसमें बिना किसी ठोस सबूत के मटन करी जैसी बातें भी शामिल थीं. क्या पता उनकी नजरें भी सोशल मीडिया पोस्ट पर पड़ती हों तो वो इन्हें पढ़कर हौले से मुस्कुरा देते हों.

मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक, शी जिनपिंग के डिनर में शामिल न होने की वजह कोई मेनू नहीं बल्कि उनकी थकान थी। लंबी उड़ान, शिखर सम्मेलन का व्यस्त शेड्यूल और प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के कारण वे थक चुके थे, इसलिए उन्होंने डिनर में जाना उचित नहीं समझा.

वहीं दूसरी तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य ब्रिक्स देशों के नेता, साथ ही कई केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री इस डिनर में शामिल हुए थे.

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