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SANJ SAMACHAR | Date: 03-09-2026 Thursday | Rajkot |
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में अप्रैल में हुए श्रमिक आंदोलन के मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा व सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत निरुद्धि को अवैध करार देते हुए रद कर दिया है।
कोर्ट ने अन्य किसी मामले में वांछित न होने पर उन्हें तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। यह राशि गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी के वेतन से अदा की जाएगी। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने आकृति की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर यह आदेश दिया।
कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और राज्य सरकार से आकृति को रासुका में निरुद्ध करने के आधार, पुलिस कार्रवाई के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य और दस्तावेज पेश करने को कहा था। उपलब्ध सामग्री के परीक्षण के बाद पीठ ने पाया कि निरुद्धि को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त आधार और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा था कि एफआइआर दर्ज करने से पहले आकृति को शांति भंग की आशंका के संबंध में कोई नोटिस दिया गया था या नहीं। इसके अलावा मजदूरों को भड़काने वाले वीडियो और वॉट्सएप चैट से जुड़ी सामग्री भी मांगी गई थी। पुलिस का आरोप था कि 13 अप्रैल को वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चल रहे श्रमिक आंदोलन के दौरान आकृति ने मजदूरों को भड़काने का प्रयास किया।
इसके बाद हिंसा और आगजनी हुई तथा सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई। हालांकि हाई कोर्ट में इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके। कोर्ट ने निरुद्धि को अवैध मानते हुए रद कर दिया और मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।