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SANJ SAMACHAR | Date: 02-09-2026 Wednesday | Rajkot |
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ईडी ने देशभर के 14 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी टोल वसूली में हुई धांधली और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई है। आइए जानते हैं कि क्या है ये पूरा मामला और कैसे सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की लूट की गई।
प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देशभर में 14 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी एनएचएआई टोल प्लाजा पर फर्जी वसूली से जुड़े मामले में की गई है। ईडी ने धन शोधन विरोधी कानून (पीएमएलए एक्ट, 2002) के तहत यह कार्रवाई की है। ईडी ने आज उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, एनसीआर और कोलकाता में अलग-अलग ठिकानों पर छापा मारा।
दरअसल आरोपियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के समानांतर एक फर्जी सॉफ्टवेयर बनाकर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की। यूपी एसटीएफ ने इस धांधली का भंडाफोड़ किया था। जांच में पता चला कि आरोपियों ने टोल वसूली का सिर्फ पांच प्रतिशत सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया और बाकी 95 प्रतिशत का घोटाला हो रहा था। ईडी ने इस मामले में दर्ज दो पुलिस एफआईआर पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू की।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि फर्जी सॉफ्टवेयर से टोल रसीदें बनाकर फर्जीवाड़ा किया गया। टोल से हुई कमाई को आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट कर दिया गया। ईडी की जांच में फोरेंसिक और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड से फर्जी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हो चुकी है। ईडी की ताजा छापेमारी का मकसद फर्जीवाड़े से जुड़े डिजिटल सबूत जुटाना, आरोपियों की पहचान करना और अपराध से हुई कमाई का पता लगाना है।