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'यूके छोड़ने पर कानूनी रोक': विजय माल्या बोले- मैं भगोड़ा नहीं; भारत सरकार पर लगाए गंभीर आरोप


સાંજ સમાચાર

विजय माल्या ने एक बार फिर खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि वह ब्रिटेन छोड़ने की स्थिति में नहीं हैं और भारत सरकार ने उनके साथ अन्याय किया है। माल्या ने यह भी दावा किया है कि उनसे 14,100 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली हो चुकी है। वहीं, भारत सरकार उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर चुकी है और बॉम्बे हाईकोर्ट भी उन्हें अदालती कार्यवाही से बचने पर फटकार चुका है। क्या है पूरा मामला? जानिए...

शराब कारोबारी विजय माल्या ने एक बार फिर खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर सवाल उठाया है। माल्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि मैं भारत लौटने से भाग नहीं रहा हूं। मुझे भगोड़ा कहने वालों को समझना चाहिए कि मैं 1992 से यूके यानी ब्रिटेन का स्थायी निवासी हूं। फिलहाल कानूनी तौर पर देश छोड़ने पर रोक है। भारत सरकार ने मेरे साथ घोर अन्याय किया।

भारत सरकार के रिकॉर्ड में विजय माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है। अक्टूबर 2025 में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया था कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत 15 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। इस सूची में विजय माल्या और नीरव मोदी समेत कई चर्चित नाम शामिल हैं।

यही वजह है कि भारत में माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, माल्या अब इसी पहचान पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि ब्रिटेन में उनका रहना किसी तरह भारत से भागने की कोशिश नहीं है, बल्कि उनके खिलाफ चल रही कानूनी स्थिति का नतीजा है।

विजय माल्या के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट भी सख्त रुख अपना चुका है। फरवरी 2026 में अदालत ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा था कि वह जानबूझकर अदालती कार्यवाही से बच रहे हैं। अदालत ने कहा था कि ऐसी स्थिति में वह समानता के आधार पर राहत की मांग नहीं कर सकते।

उच्च अदालत ने माल्या को यह स्पष्ट करने का अंतिम मौका भी दिया था कि क्या वह भारत लौटने का इरादा रखते हैं। माल्या की याचिका भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम की सांविधानिक वैधता और उन्हें भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई को चुनौती देती है। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि वह यह दर्ज करने के पक्ष में है कि माल्या अदालत के अधिकार क्षेत्र से बच रहे हैं। ऐसे में वह अपनी याचिका में राहत की उम्मीद नहीं कर सकते।

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